Tuesday, March 24, 2026

अमृत है जल

 नदियों की कल-कल में है जल,

खेतों की हरियाली में जल है।

प्यास बुझाता हर प्राणी की है जल 

जीवन की असली शक्ति है जल 

नभ से गिरती बूंदों में यह,

मोती जैसा चमकता है।

तपती धरती की छाती पर यह 

शीतलता बन बरसता है।

नहाने, खाने और सफाई में,

हर पल इसकी जरूरत है।

पेड़-पौधे हों या जीव-जंतु,

सबकी यह खूबसूरत मूरत है।

आज अगर हम न जागेंगे,

तो कल ये प्यासी दुनिया होगी।

व्यर्थ जो बहाया एक भी बूंद,

वरना जीवन की कहानी अधूरी होगी।

सहेज कर रखो इस अनमोल रतन को,

यही भविष्य का आधार है।

जल बचेगा तो कल बचेगा,

यही सुखी जीवन का सार है।


Sunday, April 2, 2023

Pustakophar 2023

 Creating Awareness for Climate Change

Gifting Books by Seniors to Juniors

at the commencement of academic session